गोरी त्रैलोक्य मोहन मंत्र साधना

Parvati Mantra Sadhana

त्रैलोक्यमोहन गौरी प्रयोगः ॥

त्रैलोक्यमोहन गौरी मन्त्र साधना  –
मंत्र सिद्ध यंत्र माला स्थापना करके मंत्र जाप करें|


माया (हीं), उसके अन्त में ‘नमः’ पद, फिर ‘ब्रह्म श्री राजिते राजपूजिते जय’, फिर ‘विजये गौरि गान्धारि’, फिर ‘त्रिभु’, इसके बाद तोय (व), मेष (न), फिर ‘वशङ्करि’, फिर ‘सर्व’ पद, फिर ससद्यल (लो), फिर ‘क वशङ्करि’, फिर ‘सर्वस्त्री पुरुष के बाद ‘वशङ्करि’, फिर ‘सु द्वय’ (सु सु), दु द्वय (दु दु), घे युग (घे घे), वायुग्म (वा वा), फिर हरवल्लभा (ह्रीं), तथा अन्त में ‘स्वाहा’ लगाने से ६१ अक्षरों का यह मन्त्रराज कहा गया है।

मन्त्र – ‘ह्रीं नमः ब्रह्मश्रीराजिते राजपूजिते जयविजये गौरि गान्धारि त्रिभुवनवशङ्करि, सर्वलोकवशङ्करि सर्वस्त्रीपुरुषवशङ्करि सु सु दु दु घे घे वा वा ह्रीं स्वाहा’।

इस मन्त्र के अज ऋषि हैं, निचृद् गायत्री छन्द है, त्रैलोक्यमोहिनी गौरी देवता है, माया बीज है एवं स्वाहा शक्ति है ।

षड्दीर्घयुक्त मायाबीज से युक्त इस मन्त्र के १४, १०, ८, ८, १० एवं ११ अक्षरों से षडङ्गन्यास करना चाहिए ।

फिर मूलमन्त्र से व्यापक कर त्रैलोक्यमोहिनी का ध्यान करना चाहिए ।

विनियोग – ‘अस्य श्रीत्रैलोक्यमोहनगौरीमन्त्रस्य अजऋषिर्निचृद्गायत्री छन्दः त्रैलोक्यमोहिनीगौरीदेवता ह्रीं बीजं स्वाहा शक्ति ममाऽभीष्टसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।’

षडङ्गन्यास – ह्रां ह्रीं नमो ब्रह्मश्रीराजिते राजपूजिते हृदयाय नमः, ह्रीं जयविजये गौरिगान्धारि शिरसे स्वाहा, ह्रूं त्रिभुवनवशङ्करि शिखायै वषट्, ह्रैं सर्वलोक वशङ्करि कवचाय हुं, ह्रौं सर्वस्त्रीपुरुष नेत्रत्रयाय वशङ्कर वौषट्, ह्रः सु सु दु दु घे घे वा वा ह्रीं स्वाहा, अस्त्राय फट्, ह्रीं नमोः ब्रह्मश्रीराजिते राजपूजिते जयविजये गौरिगान्धारि त्रिभुवनवशङ्करि सर्वलोकवशङ्करि सर्वस्त्रीपुरुष वशङ्करि सु सु दु दु घे घे वा वा ह्रीं स्वाहा, सर्वाङ्गे ।

॥ ध्यानम् ॥

गीर्वाणसङ्घार्चितपादपङ्कज अरुणप्रभाबालशशाङ्कशेखरा । रक्ताम्बरालेपनपुष्प मुदे सृणिं सपाशं दधती शिवास्तु नः ॥

॥ आवरण पूजा ॥

केशरों पर षडङ्गपूजा कर अष्टदलों में ब्राह्मी आदि मातृकाओं की, भूपुर में लोकपालों की तथा बाहर उनके आयुधों की पूजा करनी चाहिए ।

पीठ देवताओं एवं पीठशक्तियों का पूजन कर पीठ पर मूलमन्त्र से देवी की मूर्ति की कल्पना कर आवाहनादि उपचारों से पुष्पाञ्जलि समर्पित कर उनकी आज्ञा से इस प्रकार आवरण पूजा करे ।

सर्वप्रथम केशरों में षड्ङ्ग मन्त्रों से षडङ्गपूजा करनी चाहिए। यथा –

ह्रीं ह्रीं नमो ब्रह्मश्रीराजिते राजपूजिते हृदयाय नमः,

ह्रीं जयविजये गौरि गान्धारि शिरसे स्वाहा,

ह्रूँ त्रिभुवनवशङ्करि शिखायै वौषट्,
ह्रैं सर्वलोकवशङ्करि कवचाय हुम्,
ह्रौं सर्वस्त्रीपुरुषवशङ्करि नेत्रत्रयाय वौषट्,

ह्रः सु सु दु दु घे घे वा वा ह्रीं स्वाहा अस्त्राय फट् ।

फिर अष्टदल में पूर्वादि दिशाओं के क्रम से ब्राह्मी आदि का पूजन करनी चाहिए ।

१. ॐ ब्राह्मयै नमः, पूर्वदले
२. ॐ माहेश्वर्यै नमः,आग्नेये
३. ॐ कौमार्यै नमः, दक्षिणे
४. ॐ वैष्णव्यै नमः, नैर्ऋत्ये
५. ॐ वारायै नमः, पश्चिमे
६. ॐ इन्द्राण्यै नमः, वायव्ये
७. ॐ चामुण्डायै नमः, उत्तरे
८. ॐ महालक्ष्म्यै नमः, ऐशान्ये ।

तत्पश्चात् भूपुर के भीतर अपनी-अपनी दिशाओं में इन्द्रादि दश दिक्पालों की पूजा करनी चाहिए ।

इन्द्राय नमः पूर्वे, अग्नये नमः आग्नेये, यमाय नमः
दक्षिणे, नैर्ऋत्याय नमः नैर्ऋत्ये, वरुणाय नमः
पश्चिमे, वायवे नमः वायव्ये, सोमाय नमः
उत्तरे, ईशानाय नमः ईशाने,
पूर्व ईशान मध्ये ब्रह्मणे,अनंताय नमः

पश्चिम नैर्ऋत्ययोर्मध्ये ।

पुनः भूपुर के बाहर वज्रादि आयुधों की पूजा करनी चाहिए । वज्राय नमः पूर्वे,
शक्तये नमः आग्नेये,
दण्डाय नमः दक्षिणे,
खडगाय नमः नैर्ऋत्ये,
पाशाय नमः पश्चिमे,
अंकुशाय नमः वायव्ये,
गदायै नमः उत्तरे, त्रिशूलाय नमः
ऐशान्ये, पद्माय नमः पूर्वेशानयोर्मध्ये,
चक्राय नमः पश्चिमनैर्ऋत्ययोर्मध्ये ।

॥ काम्य प्रयोग ॥

इस प्रकार आराधना करने से देवी सुख एवं संपत्ति प्रदान करती हैं तिल मिश्रित तण्डुल (चावल), सुन्दर फल, त्रिमधु (घी, मधु, दूध) से मिश्रित लवण और मनोहर लालवर्ण के कमलों से जो व्यक्ति तीन दिन तक हवन करता है, उस व्यक्ति के ब्राह्मणादि सभी वर्ण एक महीने के भीतर वश में हो जाते हैं ।

सूर्यमण्डल में विराजमान देवी के उक्त स्वरूप का ध्यान करते हुये जो व्यक्ति जप करता है अथवा १०८ आहुतियाँ प्रदान करता है वह व्यक्ति सारे जगत् को अपने वश में कर लेता है । गौरी का अन्य

मन्त्र – हंस (स्), अनल (र), ऐकारस्थ शशांकयुत् (ऐं) उससे युक्त नभ (ह्) इस प्रकार ही फिर वायु (य), अग्नि (र) एवं कर्णेन्दु (ऊ) सहित तोय (व्), अर्थात् ‘व्याँ ,’फिर ‘राजमुखि’, ‘राजाधिमुखिवश्य’ के बाद ‘मुखि’, फिर माया (ही) रमा (श्री), आत्मभूत (क्लीं), फिर “देवि देवि महादेवि देवाधिदेवि सर्वजनस्य मुखं” के बाद ‘मम वशं’ फिर दो बार ‘कुरु कुरु’ और इसके अन्त में वह्निप्रिया (स्वाहा) लगाने से अड़तालिस अक्षरों का मन्त्र निष्पन्न होता है ॥ ४२-४३ ॥

मन्त्र –

“ह्स्त्रैं व्यरूँ राजमुखि राजाधिमुखि वश्यमुखि ह्रीं श्रीं क्लीं देवि देवि महादेवि देवाधिदेवि सर्वजनस्य मुखं मम वशं कुरु कुरु स्वाहा’ ।

विनियोग- ‘अस्य श्रीगौरीमन्त्रस्य अजऋषिर्निचृद्गायत्रीछन्दः गौरीदेवता, ह्रीं बीजं स्वाहा शक्तिः ममाखिलकामनासिद्धयर्थे जपे विनियोगः’ ।

षडङ्गन्यास- ह्रां ह्स्त्रैं व्यरूँ राजमुखिराजाधिमुखि हृदयाय नमः, ह्रीं वश्यमुखि ह्रीं श्रीं क्लीं शिरसे स्वाहा, ह्रूँ देवि देवि शिखायै वषट्, ह्रैं महादेवि कवचाय हुम्, ह्रौं देवाधिदेवि नेत्रत्रयाय वौषट्, ह्रः सर्वजनस्य मुखं मम वशं कुरु कुरु स्वाहा अस्त्राय फट् ।

॥ पूजाविधि ॥

देवी के स्वरूप का ध्यान करे ।

अर्घ्य स्थापन, पीठशक्तिपूजन, देवी पूजन तथा आवरण देवताओं के पूजन का प्रकार पूर्वोक्त है ।

॥ वशीकरण मन्त्राः ॥

वशीकरण मन्त्र के पूजन जप होम एवं तर्पण में मूल मन्त्र के ‘सर्वजनस्य’ पद के स्थान पर जिसे अपने वश में करना हो उस साध्य के षष्ठ्यन्त रूप को लगाना चाहिए।

सात दिन तक सहस्र-सहस्र की संख्या में संपातपूर्वक (हुतावशेष स्रुवावस्थित घी का प्रोक्षणी में स्थापन) घी से होमकर उस संपात (संव) घृत को साध्य व्यक्ति को पिलाने से वह वश में हो जाता है।

मंत्र सिद्ध यंत्र माला स्थापना करके मंत्र जाप करें|

॥ इति त्रैलोक्यमोहन गौरी प्रयोगः ॥

Parvati गोरी Devi Yantra Mala

  • गोरी त्रैलोक्य मोहन मंत्र साधना
    Parvati Mantra Sadhana त्रैलोक्यमोहन गौरी प्रयोगः ॥ त्रैलोक्यमोहन गौरी मन्त्र साधना  – मंत्र सिद्ध यंत्र माला स्थापना करके मंत्र जाप करें| माया (हीं), उसके अन्त में ‘नमः’ पद, फिर ‘ब्रह्म श्री राजिते राजपूजिते जय’, फिर ‘विजये गौरि गान्धारि’, फिर … Continue reading गोरी त्रैलोक्य मोहन मंत्र साधना
  • पार्वती कथा
    यह है माता पार्वती की जन्म कथापुराणों में बताया गया है कि एक बार सती अपने पिता प्रजापति दक्ष की ओर से आयोजित यज्ञ में शामिल होने गई थीं। वहां उनके पिता ने शिव के बारे में बहुत अपशब्द … Continue reading पार्वती कथा
  • पार्वती मंत्र साधना
    माता पार्वती का स्वरूपपुराणों के अनुसार माता पार्वती का मुख उज्ज्वल और तेजमय है। गौर वर्ण होने के कारण इन्हें माता गौरी भी कहा जाता है। इनके आठ हाथों में त्रिशूल, पास, अंकुशा, शंख, चक्र, तलवार, कमल विद्यमान हैं। … Continue reading पार्वती मंत्र साधना
  • पार्वती स्तुति
    पार्वती स्तुति: ब्रह्मादय ऊचु: त्वं माता जगतां पितापि च हर: सर्वे इमे बालका-स्तस्मात्त्वच्छिशुभावत: सुरगणे नास्त्येव ते सम्भ्रम:। मातस्त्वं शिवसुन्दरि त्रिजगतां लज्जास्वरूपा यत-स्तस्मात्त्वं जय देवि रक्ष धरणीं गौरि प्रसीदस्व न:।।1।। त्वमात्मा त्वं ब्रह्म त्रिगुणरहितं विश्वजननि स्वयं भूत्वा योषित्पुरुषविषयाहो जगति च। … Continue reading पार्वती स्तुति
  • जया पार्वती व्रत पूजा कथा
    जया पार्वती व्रत : जानिए पूजन-अर्चन और कथा प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी के दिन विशेष व्रत किया जाता है। जिसे जया-पार्वती व्रत अथवा विजया-पार्वती व्रत के नाम से जाना जाता है। य ह मालवा क्षेत्र का लोकप्रिय पर्व है … Continue reading जया पार्वती व्रत पूजा कथा
  • पार्वती हवन यज्ञ
    पार्वती हवन यज्ञ तर्पण
  • पार्वती चालीसा
    श्री पार्वती चालीसा ।।दोहा।। जय गिरि तनये दक्षजे शंभु प्रिये गुणखानि । गणपति जननी पार्वती अम्बे ! शक्ति ! भवानि ।। ।।चौपाई।। ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे । पंच बदन नित तुमको ध्यावे ।। षड्मुख कहि न सकत यश … Continue reading पार्वती चालीसा
  • पार्वती दुर्गा कवच
    देवी कवच का महत्व | आपके चारों ओर नकारात्मकता को खत्म करने के लिए एक शक्तिशाली मंत्रो का संग्रह देवी कवच के रूप में है। यह किसी भी बुरी आत्माओं से रक्षा करने में एक कवच के रूप में … Continue reading पार्वती दुर्गा कवच
  • पार्वती आरती
    माता पार्वती जी की आरती जय पार्वती माता जय पार्वती माता ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता। जय पार्वती माता जय पार्वती माता। अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता। जय पार्वती माता … Continue reading पार्वती आरती
  • Parvati Devi
    Parvati Devi
  • पार्वती देवी
    Parvati Devi Hawan🔥Service Online हवन यज्ञ सर्विस No.– Hawan हवन यज्ञ 1 Hawan Service Pujan Yagna 2 Kundalini Awakening Hawan Kundalini All Chakra Activation 3- Apsara Pujan Hawan अप्सरा मंत्र साधना हवन यज्ञ 4- NavGraha Pujan Hawan नवग्रह शान्ति … Continue reading पार्वती देवी

पार्वती कथा

यह है माता पार्वती की जन्म कथा
पुराणों में बताया गया है कि एक बार सती अपने पिता प्रजापति दक्ष की ओर से आयोजित यज्ञ में शामिल होने गई थीं। वहां उनके पिता ने शिव के बारे में बहुत अपशब्द कहा था, जिसे सुनने के बाद क्रोध में आकर माता पार्वती ने पिता के यज्ञ कुंड में ही अपने आप को भस्म कर दिया था। इसके बाद शिव को पति रूप में पाने के लिए पार्वती रूप में जन्म लिया और कठोर तप से शिवजी की अर्धांगिनी बन गईं।

पार्वती जी और उनका परिवार
माता पार्वती हिमालय के राजा हिमावन और मैनावती की बेटी हैं। माता पार्वती के दो पुत्र गणेश और कार्तिकेय हैं। कई पुराणों में शिव परिवार में शिवजी और माता पार्वती की एक पुत्री का भी उल्लेख है।

नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है। नवरात्रि के दौरान इस दिन का विशेष महत्व है। देवी महागौरी का अत्यंत गौर वर्ण हैं। इनके वस्त्र और आभूषण सफेद हैं। इनकी चार भुजाएं हैं। महागौरी का वाहन बैल है। देवी के दाहिने ओर के ऊपर वाले हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले हाथ में त्रिशूल है। बाएं ओर के ऊपर वाले हाथ में डमरू और नीचे वाले हाथ में वर मुद्रा है।
कहा जाता है कि भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए इन्होंने कठोर तपस्या की थी, जिससे इनका शरीर काला पड़ गया। इनकी कठोर तपस्या से महादेव प्रसन्न हो गए और इनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली। इनके शरीर का रंग तपस्या से काला हो जाने के कारण महादेव ने इन्हें गंगाजल से धोया तो ये फिर से गौर रंग वाली हो गईं। इसी कारण इनका नाम गौरी पड़ गया। इसी कारण कहा जाता है कि अष्टमी के दिन व्रत रखने से भक्तों को उनका मनचाहा जीवनसाथी मिलता है।
महागौरी की एक अन्य कथा भी प्रचलित है। इसके अनुसार जब मां उमा जंगल में तपस्या कर रही थीं, तभी एक शेर वन में भूखा घूम रहा था। खाने की तलाश में वहां पहुंचा जहां मां तपस्या में लीन थी। देवी को देखकर शेर की भूख बढ़ गई और शेर उनके तपस्या पूरी करने का इंतजार करने लगा। इस इंतजार में वह काफी कमजोर हो गया। देवी जब तप से उठी तो शेर की दशा देखकर उन्हें उस पर बहुत दया आई। मां ने उसे अपनी सवारी ली और एक प्रकार से उसने भी मां के साथ तपस्या की थी। इसलिए देवी महागौरी का वाहन बैल और सिंह दोनों ही हैं।

  • गोरी त्रैलोक्य मोहन मंत्र साधना
    Parvati Mantra Sadhana त्रैलोक्यमोहन गौरी प्रयोगः ॥ त्रैलोक्यमोहन गौरी मन्त्र साधना  – मंत्र सिद्ध यंत्र माला स्थापना करके मंत्र जाप करें| माया (हीं), उसके अन्त में ‘नमः’ पद, फिर ‘ब्रह्म श्री राजिते राजपूजिते जय’, फिर … Continue reading गोरी त्रैलोक्य मोहन मंत्र साधना
  • पार्वती कथा
    यह है माता पार्वती की जन्म कथापुराणों में बताया गया है कि एक बार सती अपने पिता प्रजापति दक्ष की ओर से आयोजित यज्ञ में शामिल होने गई थीं। वहां उनके पिता ने शिव के … Continue reading पार्वती कथा
  • पार्वती मंत्र साधना
    माता पार्वती का स्वरूपपुराणों के अनुसार माता पार्वती का मुख उज्ज्वल और तेजमय है। गौर वर्ण होने के कारण इन्हें माता गौरी भी कहा जाता है। इनके आठ हाथों में त्रिशूल, पास, अंकुशा, शंख, चक्र, … Continue reading पार्वती मंत्र साधना
  • पार्वती स्तुति
    पार्वती स्तुति: ब्रह्मादय ऊचु: त्वं माता जगतां पितापि च हर: सर्वे इमे बालका-स्तस्मात्त्वच्छिशुभावत: सुरगणे नास्त्येव ते सम्भ्रम:। मातस्त्वं शिवसुन्दरि त्रिजगतां लज्जास्वरूपा यत-स्तस्मात्त्वं जय देवि रक्ष धरणीं गौरि प्रसीदस्व न:।।1।। त्वमात्मा त्वं ब्रह्म त्रिगुणरहितं विश्वजननि स्वयं … Continue reading पार्वती स्तुति
  • जया पार्वती व्रत पूजा कथा
    जया पार्वती व्रत : जानिए पूजन-अर्चन और कथा प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी के दिन विशेष व्रत किया जाता है। जिसे जया-पार्वती व्रत अथवा विजया-पार्वती व्रत के नाम से जाना जाता है। य ह मालवा क्षेत्र … Continue reading जया पार्वती व्रत पूजा कथा
  • पार्वती हवन यज्ञ
    पार्वती हवन यज्ञ तर्पण
  • पार्वती चालीसा
    श्री पार्वती चालीसा ।।दोहा।। जय गिरि तनये दक्षजे शंभु प्रिये गुणखानि । गणपति जननी पार्वती अम्बे ! शक्ति ! भवानि ।। ।।चौपाई।। ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे । पंच बदन नित तुमको ध्यावे ।। षड्मुख … Continue reading पार्वती चालीसा
  • पार्वती दुर्गा कवच
    देवी कवच का महत्व | आपके चारों ओर नकारात्मकता को खत्म करने के लिए एक शक्तिशाली मंत्रो का संग्रह देवी कवच के रूप में है। यह किसी भी बुरी आत्माओं से रक्षा करने में एक … Continue reading पार्वती दुर्गा कवच
  • पार्वती आरती
    माता पार्वती जी की आरती जय पार्वती माता जय पार्वती माता ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता। जय पार्वती माता जय पार्वती माता। अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण … Continue reading पार्वती आरती
  • Parvati Devi
    Parvati Devi
  • पार्वती देवी
    Parvati Devi Hawan🔥Service Online हवन यज्ञ सर्विस No.– Hawan हवन यज्ञ 1 Hawan Service Pujan Yagna 2 Kundalini Awakening Hawan Kundalini All Chakra Activation 3- Apsara Pujan Hawan अप्सरा मंत्र साधना हवन यज्ञ 4- NavGraha … Continue reading पार्वती देवी

SadhGuru

Shiv Lok Table
No. Name Descriptions
1/2- शिव मंत्र साधना Shiv Tantra Mantra Sadhana
3/4– Shiv Lok Mantra शिव लोक मंत्र साधना Parvati Devi Mantra
5/6– Parvati पार्वती देवीDevi Sadhana शिव महामृत्युंजय मंत्र MahaMrityunjaya Mantra
7/8– उग्र साधना Ugra Shiv Power Mantra Shiv Yoga योगा
9/– Swaran स्वर्ण भैरव Gold Bhairav Mantra मंत्र साधना
10/11– शिव हवन Shiv Shakti Hawan Yajna fire ritual Mantra

पार्वती मंत्र साधना

माता पार्वती का स्वरूप
पुराणों के अनुसार माता पार्वती का मुख उज्ज्वल और तेजमय है। गौर वर्ण होने के कारण इन्हें माता गौरी भी कहा जाता है। इनके आठ हाथों में त्रिशूल, पास, अंकुशा, शंख, चक्र, तलवार, कमल विद्यमान हैं। माता का वाहन वृषभ बताया गया है। सफेद वस्त्र धारण करने वाली ममतामयी स्वभाव वाली पार्वती को मां अम्बे भी पुकारा जाता है।

यह पूजन सामग्री जरूर रखें
देवी मां की आराधना के लिए यह सामग्री जरूरी होती हैं। माता पार्वती का मंत्र सिद्ध यंत्र तथा माला गणेशजी की मूर्ति के स्नान के लिए तांबे का पात्र, तांबे का लोटा, कलश, दूध, देव वस्त्र और आभूषण रखें। चावल, दीपक, तेल, रुई,कुमकुम, धूपबत्ती, अष्टगंध। गुलाब के फूल, प्रसाद के फल, दूध, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, शक्कर, पान, दक्षिणा।

पूजा में जरूरी होता है संकल्प
पूजन से पहले संकल्प जरूर लें। हाथों में जल, फूल और अक्षत लेकर जिस दिन पूजा कर रहे हैं उसकी तिथि, वर्ष, वार और जगह का नाम अपना गोत्र लेकर अपनी इच्छा का स्मरण करें। संकल्प के बाद जल को जमीन पर छोड़ दें।

यह है पूजा विधि
प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा किसी भी शुभ कार्य में करना चाहिए। सुखदाता, मंगलकारी और मनोवांछित फल के दादा गणेशजी को सर्वप्रथम पूजने का वरदान प्राप्त है। भगवान को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। गंध, पुष्प, अक्षत अर्पित करें। अब माता पार्वती का पूजन करें। माता पार्वती की मूर्ति या यंत्र भगवान शिव के बायीं तरफ स्थापित करना चाहिए। माता का आह्वान करें। पार्वती को यंत्र में आसन दें। अब देवी के यंत्र को स्नान कराएं। जल से स्नान कराएं, फिर पंचामृत से और फिर स्वच्छ जल से स्नान कराएं। माता को वस्त्र अर्पित करने के बाद आभूषण पहनाएं। पुष्पमाला अर्पित करें। इत्र लगाकर तिलक करें। धूप और दीप जलाकर फूल और चावल अर्पित करें। घी या तेल का दीपक लगा सकते हैं। इसके बाद आरती करें। परिक्रमा के बाद नेवैद्य अर्पित करें।

अस्य स्वयंवरकलामंत्रस्य ब्रह्मा ऋषिः, अतिजगति छन्दः, देवीगिरिपुत्रीस्वयंवरादेवतात्मनोऽभीष्ट सिद्धये मंत्र जपे विनियोगः।

‘ऊँ उमामहेश्वराभ्यां नमः’’

‘ऊँ गौरये नमः

शिव पार्वती मंत्र हिंदी में । हिन्दू धर्म में एक बेहद ही प्रमुख मंत्र माना जाने वाला यह मंत्र माता पार्वती और भगवान शिव की एक साथ पूजा अर्चना के लिए समर्पित है। इस मंत्र का जाप आपको दोनों के ही प्रति सामूहिक रूप से भक्ति भाव रखते हुए करना होता है। शिव पार्वती के इस मंत्र का जाप बेहद ही लाभकारी सिद्ध होता है। 

  
ॐ उमा महेश्वराभ्यां नमः॥

शिव पार्वती मंत्र का विवरण : भगवान शिव और माता पार्वती इस मंत्र से आपको उनकी कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति सामूहिक रूप से होती है। इस मंत्र का जाप मनुष्य के भीतर आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान को बढ़ावा देता है। साथ ही यह मंत्र आपके समाज और परिवार में आपके मान-सम्मान की वृद्धि करता है और आपकी समर्थता को बढ़ाता है। यह भी कहा जाता है की इस मंत्र के जाप से व्यक्ति को शक्ति, सौभाग्य, धैर्य, और सुख की प्राप्ति होती है।

भगवान शिव का यह गायत्री मंत्र बेहद ही फलदायी माना जाता है, इसके जाप से आपको शिव जी की कृपा प्राप्त होती है और कई अद्भुत लाभ प्राप्त होते हैं। आप भी जानें इस मंत्र की महिमा और इसके जाप से होने वाले लाभ। शिव पार्वती के इस मंत्र का जाप करने के लिए शिवरात्रि, सोमवार, और शुक्रवार का दिन सबसे उचित माना जाता है। इस मंत्र का जाप करने के लिए आपको एक शांत और शुद्ध स्थान का चयन करना चाहिए, घर का पूजा घर इसके लिए उपयुक्त है। माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित इस मंत्र को आप सुबह या शाम कभी भी कर सकते हैं। साथ ही ध्यान रखें की इस मंत्र का जाप करते समय आपका मन शुद्ध और पवित्र हो।

पार्वती मंत्र
pervati mantra for fast wedding
हिन्दू धर्म में मंत्रो का बहुत महत्व है। ऐसा माना जाता है कि मंत्रो के जप से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जब भी माता के पूजन की बात होती है तो भागवत पुराण में माता पार्वती के बारे में बताया गया है। उन्हें दुर्गा, काली का रूप माना जाता है। इन्हें गौरी और अम्बे मां भी कहा जाता है।

देवी पार्वती भगवान भोलेनाथ की पत्नी के रूप में पूजी जाती हैं। मान्यता है कि पार्वती जी का व्यवहार दया, कृपा और करुणा से भरा हुआ है। इसलिए कुंवारी लड़कियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए भगवान् शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करती हैं। ऐसा माना जाता है कि यदि लड़कियां पार्वती जी के कुछ मन्त्रों का जाप करती हैं तो ये उनके लिए लाभकारी माना जाता है। आइए ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ डॉ.आरती दहिया जी से जानें माता पार्वती के मंत्रों के बारे में।


पार्वती मंत्र के जाप के लाभ
कई बार आपकी शादी में समस्या होती है और कई बार चीजें हमारे नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं कि हम रिश्ते को खत्म करने के बारे में सोच सकते हैं लेकिन पार्वती माता के मंत्र जाप से आपका विवाह सफल हो सकता है।


विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के मंत्र
parvati mantra jaap
विवाह में आ रही अड़चन को दूर करने के लिए आपको निम्नलिखित ‘स्वयंवर पार्वती मंत्र’ का जाप करना चाहिए। हिंदू मान्यता के अनुसार यह मंत्र माता पार्वती को ऋषि दुर्वासा से प्राप्त हुआ था। इसी मंत्र से माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ को पति के रूप में प्राप्त किया था।

स्वयंवर पार्वती मंत्र
ॐ ह्रीं योगिनी योगिनी योगेश्वरी योग भयंकरी
सकल स्थावर जंगमस्य मुख हृदयं मम वशं
आकर्षय आकर्षय नमः।।
जिन कन्याओ की शादी में विलंब हो रहा है उन कन्याओ को घर में माता पार्वती की तस्वीर के सामने या शिव जी के मंदिर जाकर माता पार्वती स्त्रोत का पाठ अवश्य ही करना चाहिए।



कैसे करें मंत्रों का जाप
जिन कन्याओ के विवाह में विलंब आ रहा है पूजन से पहले उसका संकल्प जरूर लें। हाथों में जल, फूल और अक्षत लेकर जिस दिन पूजा कर रहे हैं उसकी तिथि, वर्ष, वार और जगह का नाम अपना गोत्र लेकर अपनी इच्छा का स्मरण करें। संकल्प के बाद जल को जमीन पर छोड़ दें। जिन कन्याओ की शादी में देरी हो रही है गुरु पुष्य रवि पुष्य अक्षय तृतीया या श्रावण मास में निम्नलिखित मंत्रो का जप संकल्पपूर्वक शुरू करना चाहिए। इससे माता पार्वती की कृपा अवश्य ही प्राप्त होगी|

ह्रीं गौर्य नम :
है गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकर प्रिया।
तथा मां कुरू कल्याणि कान्तकान्तां सुदुर्लभाम्।।
इस मन्त्र का तात्पर्य है -हे गौरि, शंकर की अद्र्धांगिनी! जिस प्रकार तुम शंकर की प्रिया हो, उसी प्रकार हे कल्याणी! मुझ कन्या को दुर्लभ वर प्रदान करो।
माता पार्वती का सबसे प्रिय मंत्र
Mantra
ऊँ उमामहेश्वराभ्यां नमः
ऊँ पार्वत्यै नमः
शिव व पार्वती माता को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का जप भी कर सकते है इससे भी विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती हैं।
ऊँ साम्ब शिवाय नमः
ऊँ गौर्ये नमः
सावन में करें माता पार्वती के इन मंत्रों का जाप
निम्नलिखित मंत्र का जप अगर हम सावन के सोमवार से शुरू करेंगे तो हमे ये अत्यंत लाभकारी परिणाम देगा।

हे गौरी शंकरार्धांगी। यथा त्वं शंकर प्रिया। तथा मां कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम्।’
यदि कन्या के विवाह में कोई रूकावट आ रही हो तो पूजा वाले 5 नारियल लें और शिवालय में रख कर ॐ श्रीं वर प्रदाय श्री नमः मंत्र की पांच माला का जाप करें। जाप के बाद पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में चढ़ा दें। इस मंत्र से आपके विवाह की बाधाएं दूर होती जाएंगी।

अच्छे वर की प्राप्ति के लिए करें इन मंत्रों का जाप

अच्छे वर की कामना पूर्ति हेतु कन्या को निम्न मंत्र का शिव-गौरी पूजनकर एक माला का जाप करना चाहिए।

ॐ नमः मनोभिलाषितं वरं देहि वरं ह्रीं ॐ गोरा पार्वती देव्यै नमः
जल्द ही विवाह की इच्छा रखने वाले शुक्रवार के दिन भगवान शंकर पर जलाभिषेक करें तथा शिव लिंग पर ‘ॐ नमः शिवाय’ जपते हुए 108 श्वेतार्क पुष्प चढ़ाएं और शीघ्र विवाह की प्रार्थना करें। साथ ही, शिवजी पर 21 बिल्व पत्र चढ़ाएं, यह कम से कम 7 शुक्रवार करें, शीघ्र ही विवाह के प्रस्ताव आने आरंभ हो जाएंगें।

प्रत्येक सोमवार को प्रातः नहा-धोकर शिवलिंग पर
‘ॐ सोमेश्वराय नमः’
मंत्र का जाप करते हुए दूध में जल मिलाकर चढाएं और मंदिर में बैठ कर रूद्राक्ष की माला से इसी मंत्र का एक माला का जप करें। इस उपाय से विवाह आ रही बाधा दूर हो जाएंगी।

Parvati Yantra Mala Smagri

  • गोरी त्रैलोक्य मोहन मंत्र साधना
    Parvati Mantra Sadhana त्रैलोक्यमोहन गौरी प्रयोगः ॥ त्रैलोक्यमोहन गौरी मन्त्र साधना  – मंत्र सिद्ध यंत्र माला स्थापना करके मंत्र जाप करें| माया (हीं), उसके अन्त में ‘नमः’ पद, फिर ‘ब्रह्म श्री राजिते राजपूजिते जय’, फिर … Continue reading गोरी त्रैलोक्य मोहन मंत्र साधना
  • पार्वती कथा
    यह है माता पार्वती की जन्म कथापुराणों में बताया गया है कि एक बार सती अपने पिता प्रजापति दक्ष की ओर से आयोजित यज्ञ में शामिल होने गई थीं। वहां उनके पिता ने शिव के … Continue reading पार्वती कथा
  • पार्वती मंत्र साधना
    माता पार्वती का स्वरूपपुराणों के अनुसार माता पार्वती का मुख उज्ज्वल और तेजमय है। गौर वर्ण होने के कारण इन्हें माता गौरी भी कहा जाता है। इनके आठ हाथों में त्रिशूल, पास, अंकुशा, शंख, चक्र, … Continue reading पार्वती मंत्र साधना
  • पार्वती स्तुति
    पार्वती स्तुति: ब्रह्मादय ऊचु: त्वं माता जगतां पितापि च हर: सर्वे इमे बालका-स्तस्मात्त्वच्छिशुभावत: सुरगणे नास्त्येव ते सम्भ्रम:। मातस्त्वं शिवसुन्दरि त्रिजगतां लज्जास्वरूपा यत-स्तस्मात्त्वं जय देवि रक्ष धरणीं गौरि प्रसीदस्व न:।।1।। त्वमात्मा त्वं ब्रह्म त्रिगुणरहितं विश्वजननि स्वयं … Continue reading पार्वती स्तुति
  • जया पार्वती व्रत पूजा कथा
    जया पार्वती व्रत : जानिए पूजन-अर्चन और कथा प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी के दिन विशेष व्रत किया जाता है। जिसे जया-पार्वती व्रत अथवा विजया-पार्वती व्रत के नाम से जाना जाता है। य ह मालवा क्षेत्र … Continue reading जया पार्वती व्रत पूजा कथा
  • पार्वती हवन यज्ञ
    पार्वती हवन यज्ञ तर्पण
  • पार्वती चालीसा
    श्री पार्वती चालीसा ।।दोहा।। जय गिरि तनये दक्षजे शंभु प्रिये गुणखानि । गणपति जननी पार्वती अम्बे ! शक्ति ! भवानि ।। ।।चौपाई।। ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे । पंच बदन नित तुमको ध्यावे ।। षड्मुख … Continue reading पार्वती चालीसा
  • पार्वती दुर्गा कवच
    देवी कवच का महत्व | आपके चारों ओर नकारात्मकता को खत्म करने के लिए एक शक्तिशाली मंत्रो का संग्रह देवी कवच के रूप में है। यह किसी भी बुरी आत्माओं से रक्षा करने में एक … Continue reading पार्वती दुर्गा कवच
  • पार्वती आरती
    माता पार्वती जी की आरती जय पार्वती माता जय पार्वती माता ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता। जय पार्वती माता जय पार्वती माता। अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण … Continue reading पार्वती आरती
  • Parvati Devi
    Parvati Devi
  • पार्वती देवी
    Parvati Devi Hawan🔥Service Online हवन यज्ञ सर्विस No.– Hawan हवन यज्ञ 1 Hawan Service Pujan Yagna 2 Kundalini Awakening Hawan Kundalini All Chakra Activation 3- Apsara Pujan Hawan अप्सरा मंत्र साधना हवन यज्ञ 4- NavGraha … Continue reading पार्वती देवी

SadhGuru

Shiv Lok Table
No. Name Descriptions
1/2- शिव मंत्र साधना Shiv Tantra Mantra Sadhana
3/4– Shiv Lok Mantra शिव लोक मंत्र साधना Parvati Devi Mantra
5/6– Parvati पार्वती देवीDevi Sadhana शिव महामृत्युंजय मंत्र MahaMrityunjaya Mantra
7/8– उग्र साधना Ugra Shiv Power Mantra Shiv Yoga योगा
9/– Swaran स्वर्ण भैरव Gold Bhairav Mantra मंत्र साधना
10/11– शिव हवन Shiv Shakti Hawan Yajna fire ritual Mantra

पार्वती स्तुति

पार्वती स्तुति:

ब्रह्मादय ऊचु:

त्वं माता जगतां पितापि च हर: सर्वे इमे बालका-स्तस्मात्त्वच्छिशुभावत: सुरगणे नास्त्येव ते सम्भ्रम:।

मातस्त्वं शिवसुन्दरि त्रिजगतां लज्जास्वरूपा यत-स्तस्मात्त्वं जय देवि रक्ष धरणीं गौरि प्रसीदस्व न:।।1।।

त्वमात्मा त्वं ब्रह्म त्रिगुणरहितं विश्वजननि स्वयं भूत्वा योषित्पुरुषविषयाहो जगति च।

करोष्येवं क्रीडां स्वगुणवशतस्ते च जननीं वदन्ति त्वां लोका: स्मरहरवरस्वामिरमणीम्।।2।।

त्वं स्वेच्छावशत: कदा प्रतिभवस्यंशेन शम्भु: पुमा-न्स्त्रीरूपेण शिवे स्वयं विहरसि त्रैलोक्यसम्मोहिनि।

सैव त्वं निजलीलया प्रतिभवन् कृष्ण: कदाचित्पुमान् शम्भुं सम्परिकल्प्य चात्ममहिषीं राधां रमस्यम्बिके।।3।।

प्रसीद मातर्देवेशि जगद्रक्षणकारिणि ।

विरम त्वमिदानीं तु धरणीरक्षणाय।।4।।

।।इति श्रीमहाभागवते महापुराणे ब्रह्मादयै: कृता पार्वतीस्तुति: सम्पूर्णा।।

  • गोरी त्रैलोक्य मोहन मंत्र साधना
    Parvati Mantra Sadhana त्रैलोक्यमोहन गौरी प्रयोगः ॥ त्रैलोक्यमोहन गौरी मन्त्र साधना  – मंत्र सिद्ध यंत्र माला स्थापना करके मंत्र जाप करें| माया (हीं), उसके अन्त में ‘नमः’ पद, फिर ‘ब्रह्म श्री राजिते राजपूजिते जय’, फिर … Continue reading गोरी त्रैलोक्य मोहन मंत्र साधना
  • पार्वती कथा
    यह है माता पार्वती की जन्म कथापुराणों में बताया गया है कि एक बार सती अपने पिता प्रजापति दक्ष की ओर से आयोजित यज्ञ में शामिल होने गई थीं। वहां उनके पिता ने शिव के … Continue reading पार्वती कथा
  • पार्वती मंत्र साधना
    माता पार्वती का स्वरूपपुराणों के अनुसार माता पार्वती का मुख उज्ज्वल और तेजमय है। गौर वर्ण होने के कारण इन्हें माता गौरी भी कहा जाता है। इनके आठ हाथों में त्रिशूल, पास, अंकुशा, शंख, चक्र, … Continue reading पार्वती मंत्र साधना
  • पार्वती स्तुति
    पार्वती स्तुति: ब्रह्मादय ऊचु: त्वं माता जगतां पितापि च हर: सर्वे इमे बालका-स्तस्मात्त्वच्छिशुभावत: सुरगणे नास्त्येव ते सम्भ्रम:। मातस्त्वं शिवसुन्दरि त्रिजगतां लज्जास्वरूपा यत-स्तस्मात्त्वं जय देवि रक्ष धरणीं गौरि प्रसीदस्व न:।।1।। त्वमात्मा त्वं ब्रह्म त्रिगुणरहितं विश्वजननि स्वयं … Continue reading पार्वती स्तुति
  • जया पार्वती व्रत पूजा कथा
    जया पार्वती व्रत : जानिए पूजन-अर्चन और कथा प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी के दिन विशेष व्रत किया जाता है। जिसे जया-पार्वती व्रत अथवा विजया-पार्वती व्रत के नाम से जाना जाता है। य ह मालवा क्षेत्र … Continue reading जया पार्वती व्रत पूजा कथा
  • पार्वती हवन यज्ञ
    पार्वती हवन यज्ञ तर्पण
  • पार्वती चालीसा
    श्री पार्वती चालीसा ।।दोहा।। जय गिरि तनये दक्षजे शंभु प्रिये गुणखानि । गणपति जननी पार्वती अम्बे ! शक्ति ! भवानि ।। ।।चौपाई।। ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे । पंच बदन नित तुमको ध्यावे ।। षड्मुख … Continue reading पार्वती चालीसा
  • पार्वती दुर्गा कवच
    देवी कवच का महत्व | आपके चारों ओर नकारात्मकता को खत्म करने के लिए एक शक्तिशाली मंत्रो का संग्रह देवी कवच के रूप में है। यह किसी भी बुरी आत्माओं से रक्षा करने में एक … Continue reading पार्वती दुर्गा कवच
  • पार्वती आरती
    माता पार्वती जी की आरती जय पार्वती माता जय पार्वती माता ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता। जय पार्वती माता जय पार्वती माता। अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण … Continue reading पार्वती आरती
  • Parvati Devi
    Parvati Devi
  • पार्वती देवी
    Parvati Devi Hawan🔥Service Online हवन यज्ञ सर्विस No.– Hawan हवन यज्ञ 1 Hawan Service Pujan Yagna 2 Kundalini Awakening Hawan Kundalini All Chakra Activation 3- Apsara Pujan Hawan अप्सरा मंत्र साधना हवन यज्ञ 4- NavGraha … Continue reading पार्वती देवी

SadhGuru

Shiv Lok Table
No. Name Descriptions
1/2- शिव मंत्र साधना Shiv Tantra Mantra Sadhana
3/4– Shiv Lok Mantra शिव लोक मंत्र साधना Parvati Devi Mantra
5/6– Parvati पार्वती देवीDevi Sadhana शिव महामृत्युंजय मंत्र MahaMrityunjaya Mantra
7/8– उग्र साधना Ugra Shiv Power Mantra Shiv Yoga योगा
9/– Swaran स्वर्ण भैरव Gold Bhairav Mantra मंत्र साधना
10/11– शिव हवन Shiv Shakti Hawan Yajna fire ritual Mantra

जया पार्वती व्रत पूजा कथा

जया पार्वती व्रत : जानिए पूजन-अर्चन और कथा

प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी के दिन विशेष व्रत किया जाता है। जिसे जया-पार्वती व्रत अथवा विजया-पार्वती व्रत के नाम से जाना जाता है। य ह मालवा क्षेत्र का लोकप्रिय पर्व है और बहुत कुछ गणगौर, हरतालिका, मंगला गौरी और सौभाग्य सुंदरी व्रत की तरह है। इस व्रत से माता पार्वती को प्रसन्न किया जाता है।

पौराणिक पुराणों के अनुसार यह व्रत स्त्रियों द्वारा किया जाता है। माना जाता है कि यह व्रत करने से स्त्रियों को अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान प्राप्त होता है। मान्यताओं के अनुसार इस व्रत का रहस्य भगवान विष्णु ने मां लक्ष्मी को बताया था।

कहीं इसे सिेर्फ एक दिन और कहीं इसे 5 दिन तक मनाया जाता है। बालू रेत का हाथी बना कर उन पर 5 प्रकार के फल, फूल और प्रसाद चढ़ाए जाते हैं।आइए जानें कैसे करें व्रत पूजन

* आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान करें।

* तत्पश्चात व्रत का संकल्प करके माता पार्वती का स्मरण करें।

* घर के मंदिर में शिव-पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

फिर शिव-पार्वती को कुंमकुंम, शतपत्र, कस्तूरी, अष्टगंध और फूल चढ़ाकर पूजा करें।

* तत्श्चात ऋतु फल तथा नारियल, अनार व अन्य सामग्री अर्पित करें।

* अब विधि-विधान से षोडशोपचार पूजन करें।

* माता पार्वती का स्मरण करके स्तुति करें।

* फिर मां पार्वती का ध्यान धरकर सुख-सौभाग्य और गृहशांति के लिए सच्चे मन से प्रार्थना करके अपने द्वारा हुई गलतियों की क्षमा मांगे।

* तत्पश्चात कथा श्रवण करें, कथा के बाद आरती करके पूजन को संपन्न करें।

* अब ब्राह्मण को भोजन करवाएं और इच्छानुसार दक्षिणा देकर उनके चरण छूकर आशीर्वाद लें। अग र बालू रेत का हाथी बनाया है तो रात्रि जागरण के पश्चात उसे नदी या जलाशय में विसर्जित करें।जया-पार्वती व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार किसी समय कौडिन्य नगर में वामन नाम का एक योग्य ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी का नाम सत्या था। उनके घर में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उनके यहां संतान नहीं होने से वे बहुत दुखी रहते थे।

एक दिन नारद जी उनके घर पधारें। उन्होंने नारद की खूब सेवा की और अपनी समस्या का समाधान पूछा।

तब नारद ने उन्हें बताया कि तुम्हारे नगर के बाहर जो वन है, उसके दक्षिणी भाग में बिल्व वृक्ष के नीचे भगवान शिव माता पार्वती के साथ लिंगरूप में विराजित हैं। उनकी पूजा करने से तुम्हारी मनोकामना अवश्य ही पूरी होगी।

तब ब्राह्मण दंपत्ति ने उस शिवलिंग की ढूंढ़कर उसकी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस प्रकार पूजा करने का क्रम चलता रहा और पांच वर्ष बीत गए।

एक दिन जब वह ब्राह्मण पूजन के लिए फूल तोड़ रहा था तभी उसे सांप ने काट लिया और वह वहीं जंगल में ही गिर गया। ब्राह्मण जब काफी देर तक घर नहीं लौटा तो उसकी पत्नी उसे ढूंढने आई। पति को इस हालत में देख वह रोने लगी और वन देवता व माता पार्वती को स्मरण किया।

ब्राह्मणी की पुकार सुनकर वन देवता और मां पार्वती चली आईं और ब्राह्मण के मुख में अमृत डाल दिया, जिससे ब्राह्मण उठ बैठा।

तब ब्राह्मण दंपत्ति ने माता पार्वती का पूजन किया। माता पार्वती ने उनकी पूजा से प्रसन्न होकर उन्हें वर मांगने के लिए कहा। तब दोनों ने संतान प्राप्ति की इच्छा व्यक्त की, तब माता पार्वती ने उन्हें विजया पार्वती व्रत करने की बात कहीं।

आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी के दिन उस ब्राह्मण दंपत्ति ने विधिपूर्वक माता पार्वती का यह व्रत किया, जिससे उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। इस दिन व्रत करने वालों को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है तथा उनका अखंड स

  • गोरी त्रैलोक्य मोहन मंत्र साधना
    Parvati Mantra Sadhana त्रैलोक्यमोहन गौरी प्रयोगः ॥ त्रैलोक्यमोहन गौरी मन्त्र साधना  – मंत्र सिद्ध यंत्र माला स्थापना करके मंत्र जाप करें| माया (हीं), उसके अन्त में ‘नमः’ पद, फिर ‘ब्रह्म श्री राजिते राजपूजिते जय’, फिर ‘विजये गौरि गान्धारि’, फिर … Continue reading गोरी त्रैलोक्य मोहन मंत्र साधना
  • पार्वती कथा
    यह है माता पार्वती की जन्म कथापुराणों में बताया गया है कि एक बार सती अपने पिता प्रजापति दक्ष की ओर से आयोजित यज्ञ में शामिल होने गई थीं। वहां उनके पिता ने शिव के बारे में बहुत अपशब्द … Continue reading पार्वती कथा
  • पार्वती मंत्र साधना
    माता पार्वती का स्वरूपपुराणों के अनुसार माता पार्वती का मुख उज्ज्वल और तेजमय है। गौर वर्ण होने के कारण इन्हें माता गौरी भी कहा जाता है। इनके आठ हाथों में त्रिशूल, पास, अंकुशा, शंख, चक्र, तलवार, कमल विद्यमान हैं। … Continue reading पार्वती मंत्र साधना
  • पार्वती स्तुति
    पार्वती स्तुति: ब्रह्मादय ऊचु: त्वं माता जगतां पितापि च हर: सर्वे इमे बालका-स्तस्मात्त्वच्छिशुभावत: सुरगणे नास्त्येव ते सम्भ्रम:। मातस्त्वं शिवसुन्दरि त्रिजगतां लज्जास्वरूपा यत-स्तस्मात्त्वं जय देवि रक्ष धरणीं गौरि प्रसीदस्व न:।।1।। त्वमात्मा त्वं ब्रह्म त्रिगुणरहितं विश्वजननि स्वयं भूत्वा योषित्पुरुषविषयाहो जगति च। … Continue reading पार्वती स्तुति
  • जया पार्वती व्रत पूजा कथा
    जया पार्वती व्रत : जानिए पूजन-अर्चन और कथा प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी के दिन विशेष व्रत किया जाता है। जिसे जया-पार्वती व्रत अथवा विजया-पार्वती व्रत के नाम से जाना जाता है। य ह मालवा क्षेत्र का लोकप्रिय पर्व है … Continue reading जया पार्वती व्रत पूजा कथा
  • पार्वती हवन यज्ञ
    पार्वती हवन यज्ञ तर्पण
  • पार्वती चालीसा
    श्री पार्वती चालीसा ।।दोहा।। जय गिरि तनये दक्षजे शंभु प्रिये गुणखानि । गणपति जननी पार्वती अम्बे ! शक्ति ! भवानि ।। ।।चौपाई।। ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे । पंच बदन नित तुमको ध्यावे ।। षड्मुख कहि न सकत यश … Continue reading पार्वती चालीसा
  • पार्वती दुर्गा कवच
    देवी कवच का महत्व | आपके चारों ओर नकारात्मकता को खत्म करने के लिए एक शक्तिशाली मंत्रो का संग्रह देवी कवच के रूप में है। यह किसी भी बुरी आत्माओं से रक्षा करने में एक कवच के रूप में … Continue reading पार्वती दुर्गा कवच
  • पार्वती आरती
    माता पार्वती जी की आरती जय पार्वती माता जय पार्वती माता ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता। जय पार्वती माता जय पार्वती माता। अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता। जय पार्वती माता … Continue reading पार्वती आरती
  • Parvati Devi
    Parvati Devi
  • पार्वती देवी
    Parvati Devi Hawan🔥Service Online हवन यज्ञ सर्विस No.– Hawan हवन यज्ञ 1 Hawan Service Pujan Yagna 2 Kundalini Awakening Hawan Kundalini All Chakra Activation 3- Apsara Pujan Hawan अप्सरा मंत्र साधना हवन यज्ञ 4- NavGraha Pujan Hawan नवग्रह शान्ति … Continue reading पार्वती देवी

पार्वती चालीसा

श्री पार्वती चालीसा

।।दोहा।।

जय गिरि तनये दक्षजे शंभु प्रिये गुणखानि ।

गणपति जननी पार्वती अम्बे ! शक्ति ! भवानि ।।

।।चौपाई।।

ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे । पंच बदन नित तुमको ध्यावे ।।

षड्मुख कहि न सकत यश तेरो । सहसबदन श्रम करत घनेरो ।।

तेऊ पार न पावत माता । स्थित रक्षा लय हित सजाता ।।

अधर प्रवाल सदृश अरुणारे । अति कमनीय नयन कजरारे ।।

ललित ललाट विलेपित केशर । कुंकुम अक्षत शोभा मनहर ।।

कनक बसन कंचुकी सजाए । कटि मेखला दिव्य लहराए ।।

कंठ मदार हार की शोभा । जाहि देखि सहजहि मन लोभा ।।

बालारुण अनंत छबि धारी । आभूषण की शोभा प्यारी ।।

नाना जड़ित सिंहासन । तापर राजति हरि चतुरानन ।।

इंद्रादिक परिवार पूजित । जग मृग नाग रक्ष रव कूजित ।।

गिर कैलास निवासिनी जय जय । कोटिक प्रभा विकासिन जय जय ।।

त्रिभुवन सकल कुटुम्ब तिहारी । अणु अणु महं तुम्हारी उजियारी ।।

हैं महेश प्राणेश ! तुम्हारे । त्रिभुवन के जो नित रखवारे ।।

उनसो पति तुम प्राप्त कीन्ह जब । सुकृत पुरातन उदित भए तब ।।बूढ़ा बैल सवारी जिनकी । महिमा का गावै कोउ तिनकी ।।

सदा श्मशान बिहारी शंकर । आभूषण है भुजंग भयंकर ।।

कण्ठ हलाहल को छबि छाई । नीलकंठ की पदवी पाई ।।

देव मगन के हित अस कीन्हों । विष लै आरपु तिनहि अमि दीन्हों ।।

ताकी तुम पत्नी छवि धारिणि । दूरित विदारिणि मंगल कारिणि ।।

देखि परम सौंदर्य तिहारो । त्रिभुवन चकित बनावन हारो ।।

भय भीता सो माता गंगा । लज्जा मय है सलिल तरंगा ।।

सौत समान शम्भु पहआयी । विष्णु पदाब्ज छोड़ि सो धायी ।।

तेहिकों कमल बदन मुरझायो । लखि सत्वर शिव शीश चढ़ायो ।।

नित्यानंद करी बरदायिनी । अभय भक्त कर नित अनपायिनी ।।

अखिल पाप त्रयताप निकन्दिनि । माहेश्वरी हिमालय नंदिनि ।।

काशी पुरी सदा मन भायी । सिद्ध पीठ तेहि आपु बनायी ।।

भगवती प्रतिदिन भिक्षा दात्री । कृपा प्रमोद सनेह विधात्री ।।

रिपुक्षय कारिणि जय जय अम्बे । वाचा सिद्ध करि अवलम्बे ।।

गौरी उमा शंकरी काली । अन्नपूर्णा जग प्रतिपाली ।।

सब जन की ईश्वरी भगवती । प्रतिप्राणा परमेश्वरी सती ।।

तुमने कठिन तपस्या कीनी । नारद सों जब शिक्षा लीनी ।।

अन्न न नीर न वायु अहारा । अस्थि मात्रतन भयौ तुम्हारा ।।पत्र गहस को खाद्य न भायउ । उमा नाम तब तुमने पायउ ।।

तप बिलोकि रिषि सात पधारे । लगे डिगावन डिगी न हारे ।।

तब तव जय जय जय उच्चारेउ । सप्तरिषी निज गेह सिधारेउ ।।

सुर विधि विष्णु पास तब आए । वर देने के वचन सुनाए ।।

मांगे उमा वर पति तुम तिनसों । चाहत जग त्रिभुवन निधि जिनसों ।।

एवमस्तु कहि ते दोऊ गए । सुफल मनोरथ तुमने लए ।।

करि विवाह शिव सों हे भामा । पुन: कहाई हर की बामा ।।

जो पढ़िहै जन यह चालीसा । धन जन सुख देइहै तेहि ईसा ।।।।दोहा।।

कूट चंद्रिका सुभग शिर जयति जयति सुख खानि ।

पार्वती निज भक्त हित रहहु सदा वरदानि ।।

पार्वती दुर्गा कवच

देवी कवच का महत्व |
आपके चारों ओर नकारात्मकता को खत्म करने के लिए एक शक्तिशाली मंत्रो का संग्रह देवी कवच के रूप में है। यह किसी भी बुरी आत्माओं से रक्षा करने में एक कवच के रूप में कार्य करता है।
मंत्रो में नकारात्मक, प्रतिकूल कंपन को अधिक सकारात्मक और आकर्षक कंपन में बदलने की क्षमता होती है। ऐसा कहा जाता है कि वह व्यक्ति जो ईमानदारी से भक्ति और सही उच्चारण के साथ नियमित रूप से देवी कवचम को पढ़ता है, वह सभी बुराइयों से संरक्षित रहता है। नवरात्रों के दिनों में देवी कवचं का पाठ करना बहोत शुभ माना जाता है।
गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर जी कहते है “देवी कवच, देवी के भिन्न नाम हैं, जो शरीर के अलग-अलग अंगों पर आधारित हैं। ये लगभग योगनिद्रा जैसा ही है, परंतु नामों से युक्त है। हर नाम में कोई न कोई गुण और कोई न कोई ऊर्जा निहित होती है और नाम एवं रूप (आकार) में घनिष्ठ संबंध होता है।
कवच का अर्थ होता है रक्षा करने वाला, अपने चारों ओर एक प्रकार का आवरण बना देना। यह बहुत अच्छा / उत्तम है। देवी कवच (Durga Kavach) के तहत हम देवी माँ के विभिन्न नामों का उच्चारण करते हैं, जो हमारे इर्द-गिर्द, हमारे शरीर के चारो ओर एक कवच का निर्माण कर देते हैं। इसका अनुष्ठान विशेष कर नवरात्रि के सभी नवों दिन में किया जाता है। यह हमारे लिए बहुत जरूरी है। बैठ कर इसे सुने। यूं तो हमारे चारो तरफ सुरक्षा कवच है ही, फिर भी इसे सुनने से और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है – यह व्यक्ति की आत्मा को ऊर्ध्वगामी बनाता है।”

देवी कवच/दुर्गा कवच के श्लोक

॥अथ श्री देव्याः कवचम्॥
ॐ अस्य श्रीचण्डीकवचस्य ब्रह्मा ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः,
चामुण्डा देवता, अङ्गन्यासोक्तमातरो बीजम्, दिग्बन्धदेवतास्तत्त्वम्,
श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थे सप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः।
ॐ नमश्‍चण्डिकायै॥
मार्कण्डेय उवाच
ॐ यद्‌गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्।
यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥१॥
ब्रह्मोवाच
अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्।
देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥२॥
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ॥३॥
पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥४॥
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥५॥
अग्निना दह्यमानस्तु शत्रुमध्ये गतो रणे।
विषमे दुर्गमे चैव भयार्ताः शरणं गताः॥६॥
न तेषां जायते किंचिदशुभं रणसंकटे।
नापदं तस्य पश्यामि शोकदुःखभयं न हि॥७॥
यैस्तु भक्त्या स्मृता नूनं तेषां वृद्धिः प्रजायते।
ये त्वां स्मरन्ति देवेशि रक्षसे तान्न संशयः॥८॥
प्रेतसंस्था तु चामुण्डा वाराही महिषासना।
ऐन्द्री गजसमारुढा वैष्णवी गरुडासना॥९॥
माहेश्‍वरी वृषारुढा कौमारी शिखिवाहना।
लक्ष्मीः पद्मासना देवी पद्महस्ता हरिप्रिया॥१०॥
श्‍वेतरुपधरा देवी ईश्‍वरी वृषवाहना।
ब्राह्मी हंससमारुढा सर्वाभरणभूषिता॥११॥
इत्येता मातरः सर्वाः सर्वयोगसमन्विताः।
नानाभरणशोभाढ्या नानारत्नोपशोभिताः॥१२॥दृश्यन्ते रथमारुढा देव्यः क्रोधसमाकुलाः।
शङ्खं चक्रं गदां शक्तिं हलं च मुसलायुधम्॥१३॥
खेटकं तोमरं चैव परशुं पाशमेव च।
कुन्तायुधं त्रिशूलं च शार्ङ्गमायुधमुत्तमम्॥१४॥
दैत्यानां देहनाशाय भक्तानामभयाय च।
धारयन्त्यायुधानीत्थं देवानां च हिताय वै॥१५॥
नमस्तेऽस्तु महारौद्रे महाघोरपराक्रमे।
महाबले महोत्साहे महाभयविनाशिनि॥१६॥
त्राहि मां देवि दुष्प्रेक्ष्ये शत्रूणां भयवर्धिनि।
प्राच्यां रक्षतु मामैन्द्री आग्नेय्यामग्निदेवता॥१७॥
दक्षिणेऽवतु वाराही नैर्ऋत्यां खड्गधारिणी।
प्रतीच्यां वारुणी रक्षेद् वायव्यां मृगवाहिनी॥१८॥
उदीच्यां पातु कौमारी ऐशान्यां शूलधारिणी।
ऊर्ध्वं ब्रह्माणि मे रक्षेदधस्ताद् वैष्णवी तथा॥१९॥
एवं दश दिशो रक्षेच्चामुण्डा शववाहना।
जया मे चाग्रतः पातु विजया पातु पृष्ठतः॥२०॥
अजिता वामपार्श्वे तु दक्षिणे चापराजिता।
शिखामुद्योतिनि रक्षेदुमा मूर्ध्नि व्यवस्थिता॥२१॥
मालाधरी ललाटे च भ्रुवौ रक्षेद् यशस्विनी।
त्रिनेत्रा च भ्रुवोर्मध्ये यमघण्टा च नासिके॥२२॥
शङ्खिनी चक्षुषोर्मध्ये श्रोत्रयोर्द्वारवासिनी।
कपोलौ कालिका रक्षेत्कर्णमूले तु शांकरी॥२३॥
नासिकायां सुगन्धा च उत्तरोष्ठे च चर्चिका।
अधरे चामृतकला जिह्वायां च सरस्वती॥२४॥
दन्तान् रक्षतु कौमारी कण्ठदेशे तु चण्डिका।
घण्टिकां चित्रघण्टा च महामाया च तालुके ॥२५॥
कामाक्षी चिबुकं रक्षेद् वाचं मे सर्वमङ्गला।
ग्रीवायां भद्रकाली च पृष्ठवंशे धनुर्धरी॥२६॥नीलग्रीवा बहिःकण्ठे नलिकां नलकूबरी।
स्कन्धयोः खङ्‍गिनी रक्षेद् बाहू मे वज्रधारिणी॥२७॥
हस्तयोर्दण्डिनी रक्षेदम्बिका चाङ्गुलीषु च।
नखाञ्छूलेश्‍वरी रक्षेत्कुक्षौ रक्षेत्कुलेश्‍वरी॥२८॥
स्तनौ रक्षेन्महादेवी मनः शोकविनाशिनी।
हृदये ललिता देवी उदरे शूलधारिणी॥२९॥
नाभौ च कामिनी रक्षेद् गुह्यं गुह्येश्‍वरी तथा।
पूतना कामिका मेढ्रं गुदे महिषवाहिनी ॥३०॥
कट्यां भगवती रक्षेज्जानुनी विन्ध्यवासिनी।
जङ्घे महाबला रक्षेत्सर्वकामप्रदायिनी ॥३१॥
गुल्फयोर्नारसिंही च पादपृष्ठे तु तैजसी।
पादाङ्गुलीषु श्री रक्षेत्पादाधस्तलवासिनी॥३२॥
नखान् दंष्ट्राकराली च केशांश्‍चैवोर्ध्वकेशिनी।
रोमकूपेषु कौबेरी त्वचं वागीश्‍वरी तथा॥३३॥
रक्तमज्जावसामांसान्यस्थिमेदांसि पार्वती।
अन्त्राणि कालरात्रिश्‍च पित्तं च मुकुटेश्‍वरी॥३४॥
पद्मावती पद्मकोशे कफे चूडामणिस्तथा।
ज्वालामुखी नखज्वालामभेद्या सर्वसंधिषु॥३५॥
शुक्रं ब्रह्माणि मे रक्षेच्छायां छत्रेश्‍वरी तथा।
अहंकारं मनो बुद्धिं रक्षेन्मे धर्मधारिणी॥३६॥
प्राणापानौ तथा व्यानमुदानं च समानकम्।
वज्रहस्ता च मे रक्षेत्प्राणं कल्याणशोभना॥३७॥
रसे रुपे च गन्धे च शब्दे स्पर्शे च योगिनी।
सत्त्वं रजस्तमश्‍चैव रक्षेन्नारायणी सदा॥३८॥
आयू रक्षतु वाराही धर्मं रक्षतु वैष्णवी।
यशः कीर्तिं च लक्ष्मीं च धनं विद्यां च चक्रिणी॥३९॥
गोत्रमिन्द्राणि मे रक्षेत्पशून्मे रक्ष चण्डिके।
पुत्रान् रक्षेन्महालक्ष्मीर्भार्यां रक्षतु भैरवी॥४०॥पन्थानं सुपथा रक्षेन्मार्गं क्षेमकरी तथा।
राजद्वारे महालक्ष्मीर्विजया सर्वतः स्थिता॥४१॥
रक्षाहीनं तु यत्स्थानं वर्जितं कवचेन तु।
तत्सर्वं रक्ष मे देवि जयन्ती पापनाशिनी॥४२॥
पदमेकं न गच्छेत्तु यदीच्छेच्छुभमात्मनः।
कवचेनावृतो नित्यं यत्र यत्रैव गच्छति॥४३॥
तत्र तत्रार्थलाभश्‍च विजयः सार्वकामिकः।
यं यं चिन्तयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्‍चितम्।
परमैश्‍वर्यमतुलं प्राप्स्यते भूतले पुमान्॥४४॥
निर्भयो जायते मर्त्यः संग्रामेष्वपराजितः।
त्रैलोक्ये तु भवेत्पूज्यः कवचेनावृतः पुमान्॥४५॥
इदं तु देव्याः कवचं देवानामपि दुर्लभम् ।
यः पठेत्प्रयतो नित्यं त्रिसन्ध्यं श्रद्धयान्वितः॥४६॥
दैवी कला भवेत्तस्य त्रैलोक्येष्वपराजितः।
जीवेद् वर्षशतं साग्रमपमृत्युविवर्जितः। ४७॥
नश्यन्ति व्याधयः सर्वे लूताविस्फोटकादयः।
स्थावरं जङ्गमं चैव कृत्रिमं चापि यद्विषम्॥४८॥
अभिचाराणि सर्वाणि मन्त्रयन्त्राणि भूतले।
भूचराः खेचराश्‍चैव जलजाश्‍चोपदेशिकाः॥४९॥
सहजा कुलजा माला डाकिनी शाकिनी तथा।
अन्तरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्‍च महाबलाः॥५०॥
ग्रहभूतपिशाचाश्‍च यक्षगन्धर्वराक्षसाः।
ब्रह्मराक्षसवेतालाः कूष्माण्डा भैरवादयः ॥५१॥
नश्यन्ति दर्शनात्तस्य कवचे हृदि संस्थिते।
मानोन्नतिर्भवेद् राज्ञस्तेजोवृद्धिकरं परम्॥५२॥
यशसा वर्धते सोऽपि कीर्तिमण्डितभूतले।
जपेत्सप्तशतीं चण्डीं कृत्वा तु कवचं पुरा॥५३॥
यावद्भूमण्डलं धत्ते सशैलवनकाननम्।
तावत्तिष्ठति मेदिन्यां संततिः पुत्रपौत्रिकी॥५४॥
देहान्ते परमं स्थानं यत्सुरैरपि दुर्लभम्।
प्राप्नोति पुरुषो नित्यं महामायाप्रसादतः॥५५॥
लभते परमं रुपं शिवेन सह मोदते॥ॐ॥५६॥
इति देव्याः कवचं सम्पूर्णम्।

पार्वती आरती

माता पार्वती जी की आरती

जय पार्वती माता जय पार्वती माता

ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता

जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा

देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता

हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता

सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

सृष्ट‍ि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता

नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

देवन अरज करत हम चित को लाता

गावत दे दे ताली मन में रंगराता।

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता

सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।

जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।